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महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद कृष्ण और भीष्म पितामह की अंतिम वार्ता👇 Mahabharat Bhishma Varta

महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद कृष्ण और भीष्म पितामह की अंतिम वार्ता👇 भीष्म बोले, "एक बात बताओ कन्हैया! इस युद्ध में जो हुआ वो ठीक था क्या?" - "किसकी ओर से पितामह? पांडवों की ओर से?" - "कौरवों के कृत्यों पर चर्चा का तो अब कोई अर्थ ही नहीं कन्हैया, पर क्या पांडवों की ओर से जो हुआ वो सही था? आचार्य द्रोण का वध, दुर्योधन की जंघा के नीचे प्रहार, दुःशासन की छाती का चीरा जाना, जयद्रथ के साथ हुआ छल, निहत्थे कर्ण का वध, सब ठीक था क्या? यह सब उचित था क्या?" - इसका उत्तर मैं कैसे दे सकता हूँ पितामह! इसका उत्तर तो उन्हें देना चाहिए जिन्होंने यह किया। उत्तर दें दुर्योधन का वध करने वाले भीम, उत्तर दें कर्ण और जयद्रथ का वध करने वाले अर्जुन, मैं तो इस युद्ध में कहीं था ही नहीं पितामह! - "अभी भी छलना नहीं छोड़ोगे कृष्ण? अरे विश्व भले कहता रहे कि महाभारत को अर्जुन और भीम ने जीता है, पर मैं जानता हूँ कन्हैया कि यह तुम्हारी और केवल तुम्हारी विजय है। मैं तो उत्तर तुम्ही से पूछूंगा कृष्ण!" - "तो सुनिए पितामह! कुछ बुरा नहीं हुआ, कुछ अनैतिक नहीं ह...
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श्री हनुमानजी पूजन, एवं चोला चढ़ाने की प्राचीन वैदिक विधि

सनातन धर्म ग्रंथों के अनुसार श्री हनुमानजी पूजन का कलयुग मैं अत्यंत ही महत्त्व है। श्री हनुमानजी शीघ्र ही प्रसन्न होने वाले एवं फल देने वाले भगवानो में से एक हैं | यदि कोई साधक सच्ची श्रद्धा से मंगलवार के दिन श्री हनुमानजी का पूजा विधि विधान पूर्वक करे तो निःसंदेह श्री हनुमानजी शीघ्र ही साधक के समस्त कष्ट व विघ्न हर कर साधक का जीवन सुख - समृद्धि धन - धान्य से भर देते हैं।   पूजन प्रारम्भ करने से पूर्व निम्नवत दी जा रही आवश्यक पूजन सामग्री का संग्रह सुनिश्चित कर लें :- •   लाल कपडा/लंगोट •   जल कलश •   गंगाजल •   अक्षत ( साबुत चावल ) •   लाल पुष्प •   लाल पुष्पों का हार •   पंचामृत •   जनेऊ •   सिन्दूर •   चांदी का वर्क •   भुने चने •   गुड़ •   बनारसी पान का बीड़ा •   तुलसी के पत्ते •   इत्र •   सरसो का तेल •   चमेली का तेल •   घी •   दीपक •   धूप •   अगरबत्ती •...

हल्दी के ये उपाय बना सकते हैं आपको धनवान, नौकरी समेत दूसरी दिक्कतें होंगी दूर

*🔅हल्दी🔅* हम सबकी रसोई में सभी मसाले औषधीय महत्व रखते हैं उनमें से भी हल्दी का एक अलग स्थान है वह जितनी सेहत के लिए लाभप्रद है उतना ही धार्मिक कार्यों में भी उसका महत्व है। यहां हम हल्दी के धार्मिक एवं ज्योतिष में महत्व पर चर्चा करेंगे।    हल्दी विशेष प्रकार की औषधि है, जिसमें दैवीय गुण मौजूद होते हैं। विवाह में वर-वधु को हल्दी चढ़ाने के पीछे भी यही महत्व है कि उन्हें बाहरी बाधाओं से बचाया जाए साथ ही सेहत और सुंदरता के लाभ भी उन्हें मिले।    वास्तव में हल्दी का संबंध बृहस्पति ग्रह से है। बृहस्पति ग्रह से संबंधित इन उपायों को करने जीवन में सफलता मिलती है। *🍁उपाए🍁* 1. पूजा के समय कलाई में या गर्दन पर हल्दी का छोटा सा टीका लगाने पर बृहस्पति मजबूत होता है और वाणी में मजबूती आती है।   2. हल्दी का दान करना शुभ माना जाता है। इससे कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का अंत होता है। गुरु ग्रह में अनुकूलता आती है।    3. पूजा के बाद माथे पर हल्दी का तिलक लगाने से विवाह संबंधी कार्यों में सफलता मिलती है।   4. घर की बाउंड्री की दीवार पर अगर हल्दी की रेखा बना दी...

धीरज की परीक्षा ~कहानी

ये कहानी अर्जुन मिश्र नाम के ब्राह्मण भक्त की है। वो अपने परिवार के साथ उड़ीसा में रहते थे और भगवान् जग्गन्नाथ के बहुत बड़े भक्त थे।  वो रोज *श्रीमद्भगवद्गीताका पाठ करते थे, इसलिए उनका नाम गीता पांडा पड़ गया था।* उनका जीवन भिक्षा मांग कर चलता था लेकिन एक बार अकाल पड़ गया तो ५-६ दिन बीत गए पर खाने के लिये कुछ नहीं मिला। अपने परिवार की ऐसी हालत देखकर गीता पांडा की पत्नी ने उन्हें कहा कि भगवान् ने तो गीता में कहा है कि मैं अपने भक्तों का ध्यान रखता हूँ :- *अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जना: पर्युपासते।*  *तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥९.२२॥*  जो भक्तों के पास है उसका ध्यान रखता हूँ और जो उनके पास नहीं है वो भक्तों को देता हूँ। लेकिन हमने तो ६  दिनों से कुछ भी नहीं खाया है ! हमारी चिंता तो की नहीं भगवान् ने। छोटे - छोटे बच्चे हैं इतने दिन कुछ नहीं खाएंगे तो मर जायेंगे। उनकी पत्नी ने कहा कि भगवान् ने गीता में जो कहा है वो गलत है इतना कह कर वो गयी और उन्होंने इस श्लोक पर कलम से काँटा ❌लगा दिया.! कुछ देर गीता पांडा स्नान करने के लिए घर से बाहर चले गए फिर पीछे से उनक...

ईष्या, जलन,Envy, Sanskrit Shloka

ईर्ष्यी घृणी त्वसंतुष्ट: क्रोधनो नित्यशड्कितः। परभाग्योपजीवी च षडेते दुखभागिनः।।  सभी से ईर्ष्या, घृणा करने वाले, असंतोषी, क्रोधी, सदा संदेह करने वाले और पराये आसरे जीने वाले ये छः प्रकार के मनुष्य हमेशा दुखी रहते हैं। अतः यथा संभव इन प्रवृत्तियों से बचना चाहिए।

🌹🌿सुंदर कथा.🌿🌹, श्री कृष्ण,Shri Krishna Story,Bhakti

कन्धे पर कपड़े का थान लादे और हाट-बाजार जाने की तैयारी करते हुए नामदेव जी से पत्नि ने कहा- भगत जी! आज घर में खाने को कुछ भी नहीं है। आटा, नमक, दाल, चावल, गुड़ और शक्कर सब खत्म हो गए हैं। शाम को बाजार से आते हुए घर के लिए राशन का सामान लेते आइएगा। भक्त नामदेव जी ने उत्तर दिया- देखता हूँ जैसी विठ्ठल जीकी क्रपा। अगर कोई अच्छा मूल्य मिला, तो निश्चय ही घर में आज धन-धान्य आ जायेगा। पत्नि बोली संत जी! अगर अच्छी कीमत ना भी मिले, तब भी इस बुने हुए थान को बेचकर कुछ राशन तो ले आना। घर के बड़े-बूढ़े तो भूख बर्दाश्त कर लेंगे। पर बच्चे अभी छोटे हैं, उनके लिए तो कुछ ले ही आना। जैसी मेरे विठ्ठल की इच्छा। ऐसा कहकर भक्त नामदेव जी हाट-बाजार को चले गए। बाजार में उन्हें किसी ने पुकारा- वाह सांई! कपड़ा तो बड़ा अच्छा बुना है और ठोक भी अच्छी लगाई है। तेरा परिवार बसता रहे। ये फकीर ठंड में कांप-कांप कर मर जाएगा। दया के घर में आ और रब के नाम पर दो चादरे का कपड़ा इस फकीर की झोली में डाल दे। भक्त नामदेव जी- दो चादरे में कितना कपड़ा लगेगा फकीर जी? फकीर ने जितना कपड़ा मांगा, इतेफाक से भक्त नामदेव जी क...

तुलसी Tulsi Plant Astrology ,Basil Plant

🌱 रोज शाम को तुलसी पर दीया जलाने से न केवल धनलाभ होता है बल्कि घर में सुख और समृद्धि का भी वास होता है। लेकिन शास्त्रों में दीया जलाने के कुछ नियम भी बताए गए हैं।  हिंदू धर्म में तुलसी को विशेष महत्व दिया जाता है। तुलसी को मां के समान माना गया है और प्रत्येक शुभ कामों में तुलसी का प्रयोग भी किया जाता है। तुलसी के बिना भगवान विष्णु की भी पूजा अधूरी है। माना जाता है कि जिस घर में तुलसी की पूजा की जाती है। उस घर में कभी भी दरिद्रता नहीं आती। रोज शाम को तुलसी में दीपक जलाने से न केवल धनलाभ होता है। बल्कि घर में सुख और समृद्धि का भी वास होता है। लेकिन शास्त्रों में दीपक जलाने के कुछ नियम भी बताए गए हैं अगर आप उन नियमों के बारे में नहीं जानते तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे तो चलिए जानते हैं तुलसी में दीया जलाने के नियमों के बारे में... तुलसी का पौधा अगर आपके घर में लगा हो तो यह आपके एवं परिवार के लिए बहुत ही लाभकारी रहता है। तुलसी के पौधे में देवी लक्ष्मी का निवास माना जाता है और नियमित रूप से तुलसी के पौधे का पूजन करने से ज़रूर लाभ मिलता है। रोज़ाना शाम के समय तुलसी के...