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ईष्या, जलन,Envy, Sanskrit Shloka

ईर्ष्यी घृणी त्वसंतुष्ट: क्रोधनो नित्यशड्कितः। परभाग्योपजीवी च षडेते दुखभागिनः।।  सभी से ईर्ष्या, घृणा करने वाले, असंतोषी, क्रोधी, सदा संदेह करने वाले और पराये आसरे जीने वाले ये छः प्रकार के मनुष्य हमेशा दुखी रहते हैं। अतः यथा संभव इन प्रवृत्तियों से बचना चाहिए।